‘‘राम तुम्हारा वृत्त, स्वयं ही काव्य है। कोई कवि बन जाय, सहज संभाव्य है।।’’ ‘‘नहीं प्रशंसा सरल की, और नहीं सम्मान। त्रुटियाँ यदि कोई रहे, क्षमा कीजिये दान।।’’ हमारा पंजीयन राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम के अन्तर्गत दिनांक 27.04.2009 को हुआ था।