रामायण

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम युगों-युगों से जन-मानस में रचे बसे हैं। प्रभु श्रीराम की महिमा का गान महादेव शिव से लेकर जन-सामान्य तक एवं तब से आज तक, सभी के मन में एक नई शक्ति, नई ऊर्जा एवं नई चेतना का संचार करता रहा है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने ‘साकेत’ में लिखा हैः-

Description

त्रेता युग में भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम हमारे देश की संस्कृति में उसी युग से जुड़े हुए हैं, जो त्रेता युग के पश्चात् द्वापर और बाद में कलियुग में भी जन मानस में, इसी प्रकार रचे बसे हैं। राम कथा मूलतः संस्कृत भाषा में लिखी गई है। जो कालान्तर में अवधी भाषा में राम चरित मानस के रूप् में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई। इसी कड़ी में हिन्दी भाषा में दोहा चौपाई शैली में लेखक ने एक नूतन प्रयास किया है, जिसे विश्व के रामभक्तों की एक बड़ी संख्या ने पढ़ा है, उससे लाभ लिया है और काव्य को सराहा है। मैं ऐसे सभी रामभक्तों का ऋणी हूँ।

Additional information

Weight 0.5 kg
Pages

500 पृष्ठों की पवित्र पुस्तक
5000 से अधिक दोहे तथा चौपाई
100 से अधिक रंगीन चित्र

रचनाकार:

डॉ. कैलाश परवाल ‘सरल’

book

नई शैली एवं सरल प्रचलित शब्दों में