Description
त्रेता युग में भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम हमारे देश की संस्कृति में उसी युग से जुड़े हुए हैं, जो त्रेता युग के पश्चात् द्वापर और बाद में कलियुग में भी जन मानस में, इसी प्रकार रचे बसे हैं। राम कथा मूलतः संस्कृत भाषा में लिखी गई है। जो कालान्तर में अवधी भाषा में राम चरित मानस के रूप् में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई। इसी कड़ी में हिन्दी भाषा में दोहा चौपाई शैली में लेखक ने एक नूतन प्रयास किया है, जिसे विश्व के रामभक्तों की एक बड़ी संख्या ने पढ़ा है, उससे लाभ लिया है और काव्य को सराहा है। मैं ऐसे सभी रामभक्तों का ऋणी हूँ।